तू कैसे मुझे भुलायेगा!
फूस का छप्पर
मुझे रिहाई दे!
जिसने देखा ही नही, चाँद!
धूप में छाँव, है हमारा गांव
तुम्हारे पते पर भेजना है
जंज़ीर