ज़िस्म से रूह को हमने ज़ुदा किया है ये मत पूछो बेचारा दिल कैसे जिया है? भटका है सर्द रातों में ख़ुद का…
Read moreहमी इंतज़ार करें, हमी सूरज की तपिश झेलें हमारा फूस का छप्पर और हमी बारिश झेलें! तुम्हारे दिल को इज़ा…
Read moreख़ुदा उसकी यादों से अब रिहाई दे अगर तू बादलों में है तो दिखाई दे! उसके साथ, तेरा सज़दा करूँगा मैं…
Read moreहर रोज़ चाँद को तुम तकते हो नज़रें उसपर क्यों रखते हो? सज़दा उसका जायज़ है जिसने देखा ही नही, चाँद! अप…
Read moreजब कभी भी गांव में पानी की कमी होगी तुम देखना हर शख्स की आँख में नमी होगी.…
Read moreअब बारिशों के संग रहना है हमें बूँद- बूँद में बहना है! ये दिल जो कह न सका सिर्फ़ वही, तुम से कहना है…
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