मुझे रिहाई दे!

 





ख़ुदा उसकी यादों से अब रिहाई दे

अगर तू बादलों में है तो दिखाई दे!

 

उसके साथ, तेरा सज़दा करूँगा मैं

तू अगर उसकी शक़्ल में दिखाई दे!


मैं तो क़ैद मांगता हूं, ख़ुद के वास्ते

तू चाहता है देना, तो मुझे रिहाई दे!


अँधेरा लिये फिरता हूँ अपनी जेब में

अच्छा बुरा जानू, थोड़ी सी बीनाई दे!


तेरे दरबार में इसलिये आया हुआ हूँ

आख़िरी बार आवाज़ उसकी सुनाई दे!


सदायें गूँजती हैं, और भटक जाता हूँ

वहां ले चल जहाँ से मंज़िल दिखाई दे!


तेरी इशारे पर छोड़ दूँ जहाँ की दौलत

गर अपने हिस्से की तू थोड़ी सी खुदाई दे!
































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