जब कभी भी गांव में पानी की कमी होगी
तुम देखना हर शख्स की आँख में नमी होगी.
जब भी कोई बच्चा, बिलखेगा किसी घर में
सच है यहाँ, हर शख़्स की साँस थमी होगी.
छप्पर फूस का डाल कर लोग करते हैं बसेरा
ऊपरवाले से इनकी भी, उम्मीद लगी होगी.
बच्चों को पढ़ाना चाहता है हर शख्स यहाँ का
दिल में उम्मीद जगाई, कोई आस लगी होगी
मंज़िल जो इक बार मिल जाये इन्हें इनकी भी
फ़िर किसी चीज़ की इनको क्या कमी होगी?
कोई कितनी भी तरक्की क्यों न कर ले यहाँ
सिर पर आसमाँ और पैरों के नीचे ज़मी होगी.
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