ज़िस्म से रूह को हमने ज़ुदा किया है
ये मत पूछो बेचारा दिल कैसे जिया है?
भटका है सर्द रातों में ख़ुद का लहू पिया है
ये मत पूछो बेचारा दिल कैसे जिया है?
रात हो गई पर सितारों का साथ न मिला
जिसको चाहा उसी का हाथों में हाथ न मिला
जिसके काँधे पे रखता था सिर वही साक्षात न मिला
रात हो गई पर सितारों का साथ न मिला
ढूंढता रहा तुझे और तेरा नाम भी लिखा
कहाँ कोई चाहेगा हमें फ़िर तुमसा
यकीन करो मेरी बातों को सच मानो
ढूंढता रहा तुझे और तेरा नाम भी लिखा
इस जहाँ क्या, क्या उस जहाँ में
यकीनन कोई होगा न तुमसा
गलियों में आवारा बनके भटका हूँ
हमें तो कोई न मिला तुमसा
ख़ुदा एक दिन हमें मिलायेगा
जब भी चाह जायेगा....
किसी मोड़ पर तू हमसे आ टकरायेगा
ख़ुदा एक दिन हमें मिलायेगा!
मैं याद रखूँगा, तू कैसे मुझे भुलायेगा
जाते जाते नाम तू मेरा गुनगुनायेगा
ख़ुदा एक दिन हम दोनों को मिलायेगा
मैं याद रखूँगा, तू कैसे मुझे भुलायेगा!
✍️तृषि
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