रूबरू : फ़ुरसत से!

आज सड़कें सूनी हैं, चौराहे भी देखो शांत है!
फ़ुरसत है, मगर महफिलें नहीं, एकांत ही एकांत है.

घरों की महफ़िल और सड़कों का सन्नाटा अच्छा है
घर से देशभक्ति दिखाने का ये नाता बड़ा अच्छा है.

पक्षियों का कोलाहल कुछ यूं साज दे रहा है
कोई इस जहां से उस जहां को आवाज़ दे रहा है.

आज रेलगाड़ियां रुकी हुई हैं स्टेशनों पर बिना शोर के
पटरियों का हृदय भी बड़ी फ़ुरसत से धड़क रहा है.

आसमां की ऊंचाइयों से परिंदे हवाई जहाज का
अभूतपूर्व धन्यवाद भी जरूर ज्ञापित कर रहें होंगे.

आगोश में आने को बेकरार ये सारा का सारा जहां है
फिर भी हम दूसरों से पूछते रहें हैं कहां है कहां है!

कुछ चेहरे जो खुद को पहचानने में नाकाम रहें हैं
वो भी आज फ़ुरसत के पलों में धूल झाड़ रहें हैं.

आज सड़कें सूनी हैं, चौराहे भी देखो शांत है!
फ़ुरसत है, मगर महफिलें नहीं, एकांत ही एकांत है.

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