ख़ुद की भीड़ ख़ुद की तन्हाई है
ख़ुद के कांधे पर सिर रखना
ख़ुद के कांधे पर हाथ रखना
कुछ ऐसी ही नौबत आई है.
चांद सितारों की भीड़
ज़मीं पर आसमां से उतर आई
झांक के देखो तालाबों
चांद की परछाई है.
वादियों के झरने से
झड़ती जो रुसवाई है
पूर्व और पश्चिम से
ही ये रूत आई हैं.
कौन है कितना गहरा
किसकी बातों में
कितनी गहराई है
ये हवा चली तो हम तक आई.
ख़ुद की भीड़ ख़ुद की तन्हाई है
ख़ुद के कांधे पर सिर रखना
ख़ुद के कांधे पर हाथ रखना
कुछ ऐसी ही नौबत आई है.

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