ज़िंदगी वैसे भी बर्बाद थी
तुम होते तो और बात थी!
तुम्हारी तुम जानो यार....
हमारी बस इतनी औकात थी!
सब पूछ रहे थे तुम्हारे बारे में
बोल दिया, थोड़ी उदास थी!
तुम्हारा चेहरा तक याद नही
कह दिया तुम साथ खड़ी थी!
हम तुम साथ खड़े होंगे क्या
ख़्वाब मेरे इतने बड़े होंगे क्या
चाहकर भी मुमकिन नही है
कभी तुमसे लड़े होंगे क्या?
छोड़ों यार फालतू की बातें
सीधे टॉपिक पर आतें हैं
तुमको लिखकर समझाते हैं
और दिल की बात बताते हैं
हँसते चेहरे को उदास, न करना
दिल दुखाने की बात, न करना
दूर रहने का शौक है बेशक़ रहो
ख़फ़ा हो तो मुलाकात न करना!

0 Comments