मैं हिंदी और उर्दू की साझा हर बात लिखूंगा
तुम्हें चाँद! कहता था, पर महताब लिखूंगा!
सपने अब सोने नही देते हैं तुम्हारे, रातभर
हक़ीक़त न सही मगर तुम्हारे ख़्वाब लिखूंगा!
चाँद और महताब की सूरत एक है दुनिया में
आफ़ताब और सूरज एक हैं, ये बात लिखूंगा!
नज़र में फ़र्क है इस ज़माने को देखने वालों की
बातें कई हैं, पर सबसे पहले मैं मसावात रखूँगा!

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