कोई सितम नही किया

 



तुमने शहर छोड़कर कोई सितम नही किया

हमने भी तुम्हारे जाने का, ग़म नही किया!


दोनों ने बराबर किया है रुस्वा, एक दूसरे को

किसी ने ज़ियादा, किसी ने कम नही किया!


दोनों के ज़ेहन में, दोनों की तस्वीर कौंधती है

दूरियां बढ़ीं तो किसी बात का भ्रम नही किया!


ऊँची आवाज़ों से नफरत है, कानों को हमारे

तुमने धीमा बोलकर कभी भी रहम नही किया!


पूजा- पाठ करती रहती हो, बराबर तुम लेकिन

हमारे हिसाब से तुमने कभी भी श्रम नही किया!

                                                     ✍️Trishi





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