तुम्हारे बाद क्या?




तुम्हारे साथ क्या?

तुम्हारी मुस्कान!

तुम्हारे बाद क्या?

तुम्हारी याद! 


ये प्रश्न मेरे?

ख़ुद के हैं, ख़ुद से हैं!

ये किसी की जिज्ञासाओं

से नही उपजे!

बल्कि स्वयं के ह्रदय से 

स्फुटित हुए हैं!


ये कब तक जीवित रहेंगे

मेरे ह्रदय में, कौन जाने?

लेकिन इतना तो होना चाहिए

कि, ये जीवित रह सकें!


जब तक चलें मेरी साँसे

और तब तक इन प्रश्नों

को कोई चुका हुआ न माने

जब तक कोई चिकित्सक मेरी 

नब्ज़ पकड़कर ये न कह दें कि, 

देह पार्थिव हो चुकी है!


इस देह में रहने वाला प्राणी

अंत से अनंत की तरफ़

प्रस्थान कर चुका है!


तुम्हारे कानों में उसी क्षण

ये आवाज़ गूंजे कि,

तुम भी विदा दो उसे जो था

तुम्हारे लिए पराया पर 

तुम्हें अपना कहता था!

                  ✍️Trishi❤️❤️❤️




















Post a Comment

3 Comments