अच्छा सुनो यार! गुस्सा ख़तम

 





किसी को आना नही पड़ेगा

किसी को जाना नही पड़ेगा

तुम बोलती क्यों नही, यार!

बोल दो, निभाना नही पड़ेगा


अच्छा सुनो यार! गुस्सा ख़तम


हम तुम्हारी ही तरह मिट्टी के बने हैं

बना लो कोई भी बहाना तुम

यार दिल में रहो मेरे, बेझिझक

तुमको सुबूत दिखाना नही पड़ेगा


तुम दिन रात रूठी रहो हमसे

तुम्हें छूट है, तुम गाल भी फुला लो

मगर ये दिल से कह रहा हूँ कि,

तुमको, मुझे मानना नही पड़ेगा!


तुमने मेरा इंतज़ार किया है सरेराह

मैं दिल से शुक्रगुज़ार हूँ तुम्हारा!

एक बारगी ही सही मिलो तो दोबारा 

गले मिले बगैर, जाना नही पड़ेगा!


अब हाथों में हाथ न हो तो भी चलेगा

मेहनत से कमाया है जो वो तो मिलेगा

सबकुछ होगा इस दुनिया में मगर,

तुम्हें, मुझको आज़माना नही पड़ेगा!












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