मौत के साये, ज़िन्दगी भर साथ चलते हैं
दस्तूर ये कि हमनवां भी मोड़ पर मिलते!
ईक चाँद की ख़ातिर, देखो! मेरे यार तुम
इशारे पर चाँद के, कई सूरज यूँ जलते हैं!
क़ैद का आलम ये कि रिहाई का नाम न हो
सलाखों के पीछे, गुनाहों के देवता पलते हैं!
हैरान हैं सभी इस बात पर, हमें यकीं नही
बहकने वाले तेरा ज़िक्र करने से संभलते हैं!
तेरे मेरे चाहने से, कुछ नही होगा मेरे यारा
ख़ुदा की मुकर्रर, तारीख़ पर चलो मिलते हैं!
✍️Trishi

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