सब मुसाफ़िर हैं, मंज़िलों की तलाश में
किसी का किसी से कोई याराना नही हैं.
दूरियाँ क्यों बढ़ी हैं, जानते हो,बताएं?
बस उनकी गली में आना जाना नही हैं!
बेवज़ह की वजहें हज़ार हैं, पास उनके
बस हमारे पास ही कोई बहाना नही है.
हक़ीकत से वाकिफ़ हूँ, कई बरसों से मैं
सच ये है कि अब उन्हें, आज़माना नही है.
न सुनना चाहता हूं, बात उनकी इसलिए
क्योंकि, मुझे भी उसे कुछ बताना नही है.
✍️ Trishi

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