थोड़ा सा इश्क़...
थोड़ा सा इश्क़ बचाकर रखा था
सबकी नजरों से छुपाकर रखा था
मैंने उसको भी होठों से लगाया था
जिसे तुमने थोड़ा खाकर रखा था!
एक बार फ़िर आओगी यही सोचकर
वही मंगाया जो तुमने लाकर रखा था
तुम चाय पीते वक़्त याद करती हो मुझे
मुझे मालूम है फ़िर भी भुलाकर रखा था
तुम शाम को आती हो हर रोज छत पर
मैंने ये चाँद को पहले से बताकर रखा था
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