बात बननी नही थी, बिगड़ जानी थी
सिर्फ़ दो किरदारों में एक कहानी थी.
किरदार निभाना छोड़ देगी, एक दिन
ये बात तो कम से कम मुझे बतानी थी.
फ़िर कांधे पर सिर रखकर वो रोया बहुत
जिसको अपने हिस्से ही सुनानी थी.
या ख़ुदा कोई हादसा था, या वहम
तेरी नज़रों में शायद, ये नादानी थी.
फ़िर क्यों? देर लगी आने में उसको
जिसको देखकर एक सूरत भुलानी थी.
आदतों और अदाओं के अलावा भी
रूह से थी, हमनशी थी, रूहानी थी.

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