पूछें ख़ुदा उससे!....

 

मैं उम्र भर रहा ज़ुदा उससे

क्यों रहा, पूछें ख़ुदा उससे!


वक़्त बेवक़्त आवाज़ देती है

बहाने से हाल पूछ लेती है!


मुझे ही क्यों जताना पड़ता है

आंख का पानी बचाना पड़ता है!


कितना भी करूँ इग्नोर उसे

लेकिन हाल बताना पड़ता है


ख़ुद को भूलना पड़ा था,अब

ख़ुद को आईना दिखाना पड़ता है


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