जो बैठे परिंदों को ज़मी से उड़ा देते हैं
उनसे दाना पानी की उम्मीद बेईमानी है
तू जागे या सोये हर साँस तेरी अब तक है
मुझमें बाकी है जो ज़िन्दगी तेरी ज़िन्दगानी है
हमने कब कहा किसी को बेवफ़ा लेकिन
मुक्कमल इश्क़ की तो किताबी कहानी है
कुदरत परखती है इंसान को देकर तालीम
इस जहाँ के ज़र्रे में सांसों की रवानी है.
2 Comments
Bilkul sahi ...👍👍
ReplyDeleteThanks
Delete