ये पल "यादें" बन जायेंगे : बाद इसके भी ज़माना होगा!




ये पल यादें बन जायेंगे!
कागज़ की कश्ती पर बीते लम्हें, जब हिलोरें खाएंगें
उलझी हुई है डोर समय कि मिलकर सब सुलझाएंगे
गुजरें ये पल जो एक बार, फ़िर लौट के न आएंगे!



नए फूलों को भंवरे, अपनी प्यास की कहानी देंगे
आसमां के बादल, प्यासे पपीहे को फिर से पानी देंगे
कभी थमता है, कभी रुकता है, तुझको हम रवानी देंगे
ऐ वक्त हौसला रख, हम अपने हिस्से की तुझे जवानी देंगे.


कल एक नया दौर, नया ज़माना होगा!
तुम देखना! शमां के साए में फिर से परवाना होगा
फिर हंसते हुये कोई, परदेश कमाने घर से रवाना होगा
तुम देखना! हाथों में तिरंगा लिए, हर कोई दीवाना होगा



कुछ पन्नों में लिखे जाएंगे
कुछ रेत पर लिखकर छोंड़ दिए जाएंगे
ये छोंड़ हमें, फिर दूर कहीं चले जाएंगे
गुजरें ये पल जो एक बार, फ़िर लौट के न आएंगे!
























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