मौन स्वभाव





कोई किताबों से है इश्क़ कर रहा
कोई कलम से इबादत लिख रहा है.

मौन स्वीकार, स्वर भी अर्पण कर रहा
दृश्य ओझल किन्तु ये भी दिख रहा है.

इधर चरागों का कारवां निकल रहा
उधर जुगनू खुद अंधियारा हर रहा है.

इच्छाओं का नागपाश गले पड़ रहा
अंतर्मन में एक शत्रु स्वयं से लड़ रहा है.

























































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