हां तुमसे कह रहा है कोई



सुनो तुमको! इस कदर चाहता है कोई
अपनी मंज़िल पर रास्ता लुटाता है कोई

सोच सकती हो तुम तुझसे वास्ता है कोई
उड़ते हुए परिंदे सा हूं दिल में रास्ता है कोई

भटकता रहा हूं सहराओं में अब है तेरा पहरा
खुद से अंजान हूं मेरा तुझसे है राब्ता कोई


नींद न आती तुमको देखकर आईना है ठहरा
दूरियों से दूर हो खुद से भला जताता है कोई

समझा रही हो आंखों से जिनमें काजल है गहरा
तुम्हारी तरह फ़ुरसत से भला समझाता है कोई


























































Post a Comment

0 Comments