जब चाहा उसे ख़ूब लिखा
मन चाहा तो छोड़ दिया
स्मृतियों की तलवारें आज
टकराती क्यों हैं आपस में
ये फ़ैसला भी हमने
तलवारों पे छोड़ दिया!
मेघ अपनी औक़ात भूल जाते हैं
जब भी उसे रोते देख जाते हैं।
विश्वास करके ही विश्वास पाते हैं
मेघ अपनी औक़ात भूल जाते हैं।
चंचल घनी जुल्फें लहराती रहें
होंठों की लाली होंठों पे सदा
मधुर- मधुर मुस्कान लाती रहे
चंचल घनी जुल्फें लहराती रहें ।
नेह की निर्झरिणी नित्य
बहती है उसकी आस में
लहरों की ओट लिये
अश्रुओं की बूँदे एक दिन
स्नेह की धार बन जायेगी
गुज़रेगी जो हवा छूकर उसे
वो खुद में बहार बन जाएगी।
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