फ़र्क क्या है खून और पानी में
ये आप हम कैसे तय कर सकते है
इसके लिए तो बाकायदा लोकतंत्र के
नुमाइंदे हैं, जो तय करते है किसका
लहू, खून और किसका पानी है.
ये काम वोट मांगने से भी ज्यादा ही
कठिन हैं! क्योंकि? वोट मांगने में क्या?
झूठे वादे, भड़काऊ भाषण और
हिन्दू -मुस्लिम, मंदिर मस्जिद बस.
किसका लहू खून और किसका पानी है।
खून और पानी में फर्क करना जानते हो
शायद नही! लेकिन करता है कौन
कम से कम ये तो जान ही लीजिए.
इसका जिम्मा तुम! जानते हो किस पर
है, लोकतंत्र के आकाओं की
सरकारी बंदूक की गोली पर
जो पल भर में तय करती है
धर्म और जाति के मापदंडों पर
खून औऱ पानी में फ़र्क.
गर जान गए हो इसकी शर्ते भी
जान ही लो क्या जरूरी हैं! सुनो
आत्मा बेचनी पड़ती है, निर्लज्जता
की नदी में उतरना पड़ता है।
स्वाभिमान गिरवीं रखना पड़ता है
निर्दोष मासूमों का शाप झेलना पड़ता है।
है न वोट मांगने से ज्यादा कठिन सच बताना।।
0 Comments