उदासी अपने चेहरे की हर पन्ने पर उतारा नही करते
हम चाहत से उनकी कभी भी किनारा नही करते।
हम मुसाफ़िर है आशियाने की ख़्वाहिश कहाँ रखते हैं
सोचकर यही कभी कदम यहाँ तो कभी वहां रखते है।
ठहरने की बात जो मन में आ जाती है उसे दबा रखते है
यूं न तड़पाओ हम दूरियों से भी आपकी वफ़ा रखते है।
भले ही अपनी बातों से अभी तलक हम खफा लगते है
ठहरने की बात जो मन में आ जाती है उसे दबा रखते है।
पास होने को उसके हम ज़मी से चांद निहारते है
लिखते है शब्दों को बाद अपने हाथों से बिगाड़ते हैं।
लिखने को सिर्फ़ गम अपने उसकी वफ़ा लिखते है
उठते हुए हर दर्द को सीने में कुछ यूं छुपा लेते है।
हम चाहत से उनकी कभी भी किनारा नही करते।
हम मुसाफ़िर है आशियाने की ख़्वाहिश कहाँ रखते हैं
सोचकर यही कभी कदम यहाँ तो कभी वहां रखते है।
ठहरने की बात जो मन में आ जाती है उसे दबा रखते है
यूं न तड़पाओ हम दूरियों से भी आपकी वफ़ा रखते है।
भले ही अपनी बातों से अभी तलक हम खफा लगते है
ठहरने की बात जो मन में आ जाती है उसे दबा रखते है।
पास होने को उसके हम ज़मी से चांद निहारते है
लिखते है शब्दों को बाद अपने हाथों से बिगाड़ते हैं।
लिखने को सिर्फ़ गम अपने उसकी वफ़ा लिखते है
उठते हुए हर दर्द को सीने में कुछ यूं छुपा लेते है।
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