माथे की बिंदिया संग सुनहरा रूप लिखा है
कश्मीर को कलमकारों ने क्या ख़ूब लिखा है
कश्मीर को मिलाकर वतन को संपूर्ण लिखा है
कश्मीर को कलमकारों ने क्या ख़ूब लिखा है।
सियासत की साज़िशों से कश्मीर को दूर लिखो
कश्मीर को मिलाकर वतन को संपूर्ण लिखों।
वादियों को लिखों चाहे तो झीलों का गान लिखो
मासूमों की आवाज़ो का भी थोड़ा पैगाम लिखो।
वादियों की बस्ती में रहती है आदमियत वर्षों से
मज़हब की कलम से इन्हें न हिन्दू न मुसलमान लिखो।
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