क्यों ये मन मचलता, कच्चे सपनों पे है पलता
क्यों ये मन उलझता, उलझे सपनों को है बुनता।
बेग़ैरत हैं अना की तस्वीरें, ये क्यों सांचे में ढलता
चाँद से सिफ़ारिश, सूरज से क्यों फरियाद करता।
चाँद से सिफ़ारिश, सूरज से क्यों फरियाद करता।
ख़ुद से भी मशविरा करो, किसी से सलाह न लो
समन्दर से गुज़रने वालों, दरिया की थाह न लो।
समन्दर से गुज़रने वालों, दरिया की थाह न लो।
मन के व्याकुल पक्षी को, उड़ने को आकाश भी दो
भ्रमित भंवर से मन को तुम, मधु की प्यास भी दो।
भ्रमित भंवर से मन को तुम, मधु की प्यास भी दो।
जीवन का यथार्थ है मन, इसको मधुर मिठास भी दो
मधुर मिलन के सपने को थोड़ा सा इतिहास भी दो।
मधुर मिलन के सपने को थोड़ा सा इतिहास भी दो।
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