चाँद टूट गया टुकड़ों में
बारिश की बूंदों सा बिख़र गया
बूँद पड़ी जो कलियों पर
फूलों का गुलिस्तां निखर गया।
जुगनुओं की बस्ती में अँधेरा हो गया
चाँद डूबा कि देखो! सवेरा हो गया
तेरा था जो कल आज मेरा हो गया
जुगनुओं की बस्ती में अँधेरा हो गया
वो तन्हाई रात के इंतज़ार में काटते रहे
मुख़ातिब महताब से दर्द-ए-शब बांटते रहे
कुछ यूँ ही यकीनन अपने सब से राब्ते रहे
वो तन्हाई रात के इंतज़ार में काटते रहे।
चाँद टूट गया टुकड़ों में
बारिश की बूंदों सा बिख़र गया
बूँद पड़ी जो कलियों पर
फूलों का गुलिस्तां निखर गया।
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