उन्नाव रेप केस की पीड़िता आज जिस हालत में लखनऊ के अस्पताल केजीएमयू( ट्रामा सेंटर) में ज़िन्दगी और मौत की जंग लड़ रही है। उसकी इस हालत के लिए किसको जिम्मेदार ठहराना उचित होगा? शासन, प्रशासन या फिर फिर सामाजिक ताने बाने को।
आख़िर किससे न्याय की उम्मीद लगाए उस पीड़िता की मां जिसने अपना सबकुछ गवां दिया। उसको सरकार और प्रशासन के सामने नतमस्तक होने के बाद भी न्याय नही मिला।
चार जून 2017 को उसकी नाबालिक बेटी के साथ सेंगर के घर में रेप की घटना होती है, और फिर बाप की न्यायिक हिरासत में संदिग्घ परिस्थितियों मौत होना अपने आप मे एक बड़ा सवाल है विधायक के रसूख़ के आगे प्रदेश सरकार भी असहाय नज़र आती है.
तभी तो उच्च न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद विधायक की गिरफ़तारी होती है।
विधायक की गिरफ़तार होने के बाद भी पीड़ित परिवार की मुसीबतें कम होने का नाम नही लेती है।
लगातार पीड़ित के परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती रही है।
हद तो तब हो जाती है, पीड़िता रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मिलने के लिए जाती है और रोड पर रांग साइड से आ रहे ट्रक उसकी कार का एक्सीडेंट हो जाता है, और ट्रक की नंबर प्लेट पर कालिख पुती होती है।
लड़की की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी भी उसके साथ नही होते है। और वे बहाना बनते हुए कहते है कि कार में जगह नही थी, पुलिस महकमे के लिए इससे शर्मनाक क्या हो सकता है कि पीड़िता की सुरक्षा में कोताही बरतने के बावजूद महकमा अपनी इस करतूत पर लीपापोती कर रहा है।
और कहा कि पीड़ित ने सुरक्षाकर्मियों को साथ ले जाने से मना किया था। ऐसी बयानबाजी एनकाउंटर करने वाली पुलिस और सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाती है।
एक्सीडेंट में पीड़िता की चाची और मासी की मौत हो गयी है और वकील भी गंभीर रूप से घायल है।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल हादसे के तुरंत बाद ही लखनऊ पहुच गयी पीड़िता का हाल जानने के लिए और प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष को तीन- चार दिन का समय लगता है पीड़ित का हाल जानने के लिए।
स्वातिमालीवाल ने पीड़ित को इलाज के लिए दिल्ली भेजने की मांग भी की थी। कुछ कारणों के चलते उसका इलाज़ यही पर ही होगा।
पीड़ित के समर्थन में सारा देश खड़ा है। देश की नामचीन हस्तियां भी इस प्रकरण पर नज़रे बनाये हुई है।
उन्नाव केस को सुप्रीम कोर्ट की संस्तुति के बाद दिल्ली ट्रान्सफर कर दिया गया है और कोर्ट ने पीड़िता को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है।
अंत में यही कहना चाहूंगा कि पीड़िता जल्द से जल्द स्वस्थ हो और उसको समुचित न्याय और दोषियों को सजा मिले।
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