आंसू क्यों ठहरे आँखों में

उन आँखों की नज़रों से मिरी
नज़रों का मुखातिब होना।
आंसू क्यों ठहरे आँखों में
उनके नयनों से मेरा रोना।

नयनदीप है, आँखे उनकी
अश्रुमोती बन नेत्रों से बहना!
उन आँखों की नज़रों से मिरी
नज़रों का मुखातिब होना।

शाश्वत सम्मान पिरोती वो आँखे
हां रोती है, रुलाती हैं, वों आँखे।
बहुत याद आती हैं, वो आँखे!
हां रोती हैं रुलाती हैं, वो आँखे।

भूलना चाहू जिन्हें मैं, उनका
स्मरण कराती है, वो आँखे
शाश्वत सम्मान पिरोती वो आँखे,
हां रोती हैं,रुलाती हैं वों आँखे।

कर्ज़दार ख़ुदा का,खुदकिस्मत
हूँ, हम दोनों का ख़ुदा एक है।
नज़रिया हैं अलग फ़िर भी
मिलता-जुलता एक सा है।

बस एक ख्वाब बुना था
आंखों से आँखों के होते
रिश्तों के बारे में सुना था
हा ऐसा ख्वाब बुना था!

उन आँखों की नज़रों से मिरी
नज़रों का मुखातिब होना।
आंसू क्यों ठहरे आँखों में
उनके नयनों से मेरा रोना।







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