पांच साल की मोदी सरकार

                 
2014 के आम चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से पराजित व जनता से बड़े-बड़े वादे करके अपने सहयोगी दलों के साथ सत्ता में पहुँची बीजेपी के पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान देश में विकाश के साथ जमकर हिन्दू- मुस्लिम भी हुआ। राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्रभक्ति का भी द्वन्द देखने को मिला। गाय और मंदिर भी चर्चा के केंद्र में बने रहे।
केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी की सरकार ने इन पांच वर्षों के दौरान लगभग 160 योजनाएं शुरू की जिनमें सेना के लिए वन रैंक वन- वन पेंशन, जनधन योजना के तहत जिनके खाते नही थे खाते खुलवाये गये, मुद्रा योजना,डिजिटल इंडिया, महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना,स्किल इंडिया,आयुष्मान भारत योजना, किसानों के लिए फसल बीमा और अपने आखिरी चुनावी बजट में 3 एकड़ से कम भूमि वाले सीमान्त किसानों को प्रतिवर्ष 6 हज़ार रुपये तीन किस्तो में देने का भी वायदा किया है।
इसके अलावा भी हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ करने का प्रयास किया है।
मोदी के समय ही नोटबंदी भी की गयी और 1जुलाई 2017 की मध्य रात्रि को जीएसटी भी लागू हुई जहाँ सरकार ने इन फैसलों को जनहित में बताया वही विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने  नोटबन्दी को सदी का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए सरकार के नोटबंदी के फैसले पर तीखा प्रहार भी किया और जीएसटी को व्यापारियों के खिलाफ बताया।
मोदी सरकार ने देश के जिन गांवों में अभी तक बिजली नही  पहुंची थी उन 18 हज़ार गावों में बिजली भी पहुंचाने का काम सौभाग्य योजना के माध्यम से किया।
यदि देखा जाए तो मोदी सरकार के इन पांच सालों में देश की सेना पर कश्मीर में आज भी पत्थरबाज पत्थरबाजी करते है।
इस घटना पर कोई संज्ञान न लेते हुए। सेना द्वारा 2016 में उरी में सर्जिकल स्ट्राइक का लाभ लेने की खातिर सार्वजिनक/ राजनीतिक मंचो से बखान करते हुए वर्तमान सरकार ने लाभ लेने की कोशिश की विपक्ष भी सरकार से कही पीछे नही है ।
कोई सुबूत मांगता है, तो कोई देश के प्रधानमंत्री पर अवांछनीय टिप्पड़ी करने का एक भी मौका नही गंवाना चाहता है।
यही हाल अभी जल्द सी आर पी एफ के काफ़िले पर हुए हमले के बाद भी है। टीका- टिप्प्णी जारी हैं।
इन पांच सालों में देश में आर्थिक असमानता भी तेज़ी से पनपी है। देश की 50 प्रतिशत गरीबों की जितनी सम्पति है, उसके बराबर सम्पति सिर्फ देश के नौ अमीर व्यक्तियों के पास है।
मोदी सरकार की तुलना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करे तो देश की अर्थव्यवस्था फ्रांस को पछाड़कर विश्व की छठे नंबर की अर्थव्यवस्था बनी। इज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भी हमारी रैंकिंग सुधरी है।
तो वही विश्व खुशहाली सूचकांक में देश की रैंकिंग पिछले दो तीन वर्षों से गिर रही है भारत वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में पडोसी मुल्क बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी नीचे खड़ा है।
नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में एक समय ऐसा भी आया जब देश के सर्वोच्च न्यायालय के चार जजों ने 18 जनवरी 2018 को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश दीपक  मिश्र के कामकाज करने के तौर तरीकों पर सवाल उठाये थे।
ये एक ऐसा कदम था जिसनें देश की न्याय प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया। देश के तमाम कानून के जानकारों को देश की न्याय प्रणाली पर सोचने पर मज़बूर किया।
इन सबके अलावा भी बहुत कुछ घटित हुआ इन बीते पांच सालों में जिसका आंकलन व मोदी सरकार के पांच साल के कामकाज का निष्कर्ष निकालने में 17 वीं लोकसभा के मतदाताओं की भूमिका बड़ी होगी।



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