राहें बिछड़ेंगी, मंज़िले अलग होंगी





छोड़ दूंगा यह सफ़र मोड़ लूंगा रास्ते,
दुनिया मिले न मिले मैं तेरे वास्ते.

ख़्वाहिश मेरी तेरा दिल जीतने की,
नही निकला हूँ, दुनिया जीतने के वास्ते.

मत सोचो की जुदा हो जायेंगे रास्तें.
जियो इस सफ़र को खुदा के वास्ते

छोड़ दूंगा यह सफ़र मोड़ लूंगा रास्ते,
दुनिया मिले न मिले मैं तेरे वास्ते.

तेरी कमी यूँ सालती है मुझको मेरी जां
मेरी जिंदगी से मांगती है तुझको.

तू दूर होकर भी मुझमें ठहरती है कहीं पे,
ये तुझे भी पता पर, तू  मानती नही!

होकर जुदा रह पाना मुश्किल होगा
साथ गुजारे पलों, मुलाकातों का सहारा होगा!

जो साथ हँसता है साथ रोता है
वो चंद लम्हों का मेहमां होता है!

क्या हम उन्हें भुला सकते हैं,
जो दिल से रूह के हो चुके हैं.

ग़मों कि महफ़िल में एक गम हमारा होगा,
 वक्त गुजरेगा फ़िर से तेरी मुलाकातों का सहारा होगा!

तू भूल भी जाएगी तो कोई बात न होगी,
मैं सोच लूँगा तेरी मेरी मुलाक़ात न होगी!

राहें बिछड़ेंगी, मंज़िले अलग होंगी
साथी कोई और हमसफ़र कहीं और होगा!

भूलकर भी तुम्हें नही भूल पाएंगे,
चाहे जो सिलसिला हो जिंदगी का.

वक्त कैसा भी हो, माज़रा कुछ भी हो
सिर्फ तुम्हारी यादों का दौर होगा.

शायद सच है हमसफ़र का होना
साथी न तेरे सिवा कोई और होगा.

राहें बिछड़ेंगी, मंज़िले अलग होंगी
साथी कोई और हमसफ़र कहीं और होगा!




Post a Comment

0 Comments