आधी आबादी का पूरा हक़

                   
सुबह नींद से जागे तो हर दिन की तरह निगाहें अख़बार से मुख़ातिब होने के लिए बेचैन थी.
आँखो का बेचैन होना लाजिमी भी था, शायद क्योंकि आज का दिन यानि की 8 मार्च को दुनिया भर में विश्व महिला दिवस के रूप में मनाया जाता हैं.
यदि हम सबसे पहले महिला दिवस की बात करें तो अमेरिका में 28 फ़रवरी 1908 को यह दिवस मनाया गया था. लेकिन जर्मनी ने महिलाओं को मताधिकार दिलाने के लिए 8 मार्च 1914 को आयोजित किया.
तब से लेकर आज तक महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है.
महिलाओं को प्राचीन काल से ही देवी की उपाधि से नवाज़ा गया है, जिसके बदले देश के पित्रसत्तात्मक सोच वाले लोगों ने उनके अधिकारों की खूब बलि चढ़ाई है.
इसके लिए सिर्फ़ पुरुषों को ही दोषी नही ठहराया जा सकता है. कुछ महिलाएं भी हैं जो समाज में महिलाओं के बढ़ते कदमों को रोकने का प्रयास करती हैं.
आज महिलाएं हर क्षेत्र में तरक्की का परचम लहरा रही हैं बात चाहे किसी हुनर की हो या कोई भी काम हो महिलाओं को यदि अवसर मिला है, तो उन्होंने उसे बखूबी अंज़ाम दिया है.
शिक्षा में भी लड़कियाँ अव्वल रही हैं. यही यही वजह है कि वर्ल्ड एकॉनॉमिक फ़ोरम कि रिपोर्ट में भारत को लड़कियों  को दी जा रही शिक्षा के लिहाज से दुनिया में नंबर 1 माना गया है.
कल्पना चावला जो अंतरिक्ष मे जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी.
जिन पर आज भी सारा देश गर्व करता है.
वर्तमान में रक्षा मंत्रालय का दायित्व निर्मला सीतारमन के कंधो पर हैं, इसी से आंकलन किया जा सकता है की महिलाओं और पुरूष के बीच भेद करना लोगो की भूल होती हैं. महिलाएं सिर्फ चूल्हा- चौके तक ही सीमित नही हैं. उनके और भी कर्तव्य होते हैं.
 और  साक्षी मलिक, सानिया मिर्ज़ा, विनेश फोगात, सायना नेहवाल, मिताली राज, आदि भारतीय खेल जगत की मशहूर हस्तियां हैं, जो किसी परिचय की मोहताज नही इन्होंने जो भी मुकाम हासिल किया है उसके लिए उनकी खेल के प्रति लगन, दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज में अपना वजूद का अहसास कराने के उनके जज्बें को सलाम किया जाना चाहिए.
देश में लगभग हर जगह महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है चाहे राजनीति हो, प्रशासन हो, समाज सेवा, फिल्म जगत, निजी क्षेत्र हो या फिर स्वरोजगार हो.
ऐसा होना देश के लिए शुभ संकेत हैं पर आज भी बहुतायत संख्या में समाज में महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है.
जानकारी के अभाव में उन्हें समाज की मुख्य धारा से वंचित किया जा रहा है.
उन्हें उनके अधिकारों की रक्षा के लिये शिक्षित किया जाना चाहिए.






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