गुल का ग़ुलाब होना!











वर्षों तलक रहा हूँ,  माली मैं कई बगीचों का,
हिफाजत सिर्फ उन कांटों भरे गुलाबों कि, की है.
जिनको पाना मेरी चाहत थी,
उनके न चाहने में भी चाहत थी.
फूल कब हुआ है, चमन के रखवालों का,
हमेशा टूटकर किसी और के गुलदान का गुल होके महकता है.
वर्षों तलक रहा हूँ, माली मैं कई बगीचों का,
हिफाजत सिर्फ उन कांटो भरे गुलाबों कि की है.
गुलाब रहता है जब तक बगीचे की अपनी शान होती है.

टूटकर बिखर जाएं पंखुड़ियाँ जो गुलाब की,
 चमन के माली की रातों की नींद हराम होती.
गुलाब के होने से चमन गुलजार रहता है.
गुलाब न हो तो हरा भरा चमन भी बेज़ार-  सा लगता है.
चमन में होते हैं कई सारे फूल,  गर लेने आये कोई फूल गुलाब का,  तो माली भी फूल देने से कतराता है,
क्योंकि  होता है, ये फूल चाहत का माली जानकर इतराता है.
गुलाब रहता है जब तक, बगीचे की अपनी शान होती है टूटकर बिखर जाएं पंखुड़ियाँ जो गुलाब की, चमन के माली की रातों की नींद हराम होती.

गुलाब को यूहीं नही कहा जाता राजा फूलों का,
इसका अद्वितीय सौंदर्य, ढेरों खूबियाँ इसको बहुत कुछ कहने की वजहें बनती हैं.
इसकी काँटों भरी डालियाँ, अपने फूलोँ के लिए झुकी रहती हैं.
कहना होता है बहुत कुछ फिर भी कुछ नही कहती हैं .
होती मालूम जो गुलाब को, गुलाब की खूबियाँ,
फ़िर न होती उनकी मासूमियत इतनी मासूम,
उनकी हंसी भी, इतनी हसीन न होती.
सांझे ढल भी जाती, उनकी तन्हाइयों भरी गुलाबी यादों में,  फिर से एक बार के लिए.
मौसम की फिज़ाओं में फूल ए- गुलाब तू अपनी महक छोड़ जाना.
इन आँसुओं के बेग़ैरत बादलों का भरोसा नही कब बरस जाएं.
होती मालूम जो गुलाब को, गुलाब की खूबियाँ,
फ़िर न होती, उनकी मासूमियत इतनी मासूम,
उनकी हंसी भी, इतनी हसीन न होती.



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