इंतज़ार किसका और किस बात का करे? मन रुका, ठहरा मन ने सोचा चलो तिरस्कार न करे।
इंतज़ार ही है जब अपनी किस्मत में फिर क्यों न इंतज़ार ही करे।
कोई कितना भी सताए, दुख दे आपको, कर न सके प्यार तो, तिरस्कार न करे।
इंतज़ार किसका और किस बात का करे? मन रुका, ठहरा चलो तिरस्कार न करे।
कोई कितना भी सताए, दुख दे आपको, कर न सके प्यार तो, तिरस्कार न करे।
इंतज़ार किसका और किस बात का करे? मन रुका, ठहरा चलो तिरस्कार न करे।
तिरस्कार किया दुनिया मे जिसने भी दूसरों का, बड़े बुजुर्गों का सदा ही उन्हें दुख मिला।
तिरस्कार करेंगे इस जग में तो, तिरस्कार ही मिलेगा, और अब तक है मिला।
होंगे करीब वो भी, जिन्होंने सदैव अपमान किया,पर आपने अपमान का घूट अमृत समझकर पिया।
तिरस्कार किया दुनिया मे जिसने भी दूसरों का, बड़े बुजुर्गों का सदा ही उन्हें दुख मिला।
तिरस्कार करेंगे इस जग में तो, तिरस्कार ही मिलेगा, और अब तक है मिला।
होंगे करीब वो भी, जिन्होंने सदैव अपमान किया,पर आपने अपमान का घूट अमृत समझकर पिया।
तिरस्कार किया दुनिया मे जिसने भी दूसरों का, बड़े बुजुर्गों का सदा ही उन्हें दुख मिला।

1 Comments
Waw kya line hai
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