यादों की श्वेत स्याही से कुछ इस तरह लिखूँ,
सब कुछ काला कर दूं।
करके अपनी जिंदंगी में अंधेरा,
सब की जिंदंगी में रंग ए- उजाला भर दूं।
अपनाकर् सारे जहां की तन्हाइयों को,
हो खुशियों का संसार उनका तमन्ना मेरी कर सकू तो,
कुछ ऐसा कर दूं।
यादों की श्वेत स्याही से कुछ इस तरह लिखूँ,
सब कुछ काला कर दूं।
रातें है काली उनकी यादें हमने है संभाली।
अब अपने दिल को संभालने को जी चाहता है।
दिल भावो का दरिया है,
जो हो गया किसी का उस पर अपना कोई हक नही।
जो निकला इन हाथों से,
रोकना उसे मेरे बस में नही।

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