पांच साल में निकले हैं,
अरे! ये वादे तो पिछले हैं
तुम रखो चुनाव में ध्यान मेरा
तुम्हरी ख़ातिर तो वादों की फसलें हैं
तुमको भी एक जिम्मेदारी दे देंगे
जाने कब से सूखा झेल रहे हो
लाभ एक योजना का सरकारी दे देंगे
लेकिन...
हर वोट पे नज़र तुम्हारी हो
जैसे काम ये सरकारी हो
नही तो चूक हमारी होगी
हम हार गयें यदि तो भईया
ये हम सबकी लाचारी होगी
अरे अबकी सीट संशय मा है
जरा जोर से जोर लगावा ओ भइया
खाय पिया के तैयार है कीन्हा
वोट की ताकत देखावा ओ भईया
अबकी चुनाव जितावा ओ भईया
हम जानित हैं, विपक्ष मा हौ हमरे
पेटी दुई पेटी हमहूँ से भी ले जावा हो भईया
कुछ भी करिहौ चुनाव अबकी जीतावा हो भइया
अरे पांच साल में ढाई साल की खातिर ही
तुम हमका प्रधान बनावा ओ भइया
अरे काकी, काका, दादा, दादी
सबका वोट दिलावा ओ भईया
कुछ भी करिहौ चुनाव अबकी जीतावा हो भइया
✍️ Trishi
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