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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले साल नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में भड़काऊ बयान देने के आरोप में रासुका के तहत मथुरा जेल में बंद डॉ कफील खान को रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डॉ कफील खान को गिरफ्तार करना और सजा कि अवधि को बढ़ाना गैर कानूनी है.
PC googleकोर्ट ने बयान को बताया एकता बढ़ाने वाला बयान
गौरतलब है कि जिस बयान के लिए डॉ कफील खान 9 महीने से जेल में हैं. उच्च न्यायालय ने उस बयान को लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देने वाला बयान कहा है. इसी के साथ कोर्ट ने कफील खान पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को रद्द कर दिया है. और उनको तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है.
पत्नी ने कहा एनएसए का गलत इस्तेमाल मत कीजिए
उनकी पत्नी शाबिस्ता ने कफील खान की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, एक व्यक्ति जिसने कुछ भी गलत नहीं किया उस पर एनएसए लगाकर उसे जेल में डाल दिया जाता है. उन्हें सात महीने तक प्रताड़ित किया जाता रहा. उनके जिंदगी के सात महीने छीन लिए गए. शबिस्ता ने सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आपके पास पावर है प्लीज़ इसका गलत इस्तेमाल न करें.
2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन सिलेंडर की कमी कि वजह से सैकड़ों बच्चों की मौत के मामले के बाद चर्चा में आए कफील खान को यूपी सरकार ने प्राइवेट प्रैक्टिस सहित भ्रष्टाचार के आरोपों सहित कई अन्य आरोपों के चलते निलंबित कर दिया था.
मुंबई एयरपोर्ट से एसटीएफ ने लिया था हिरासत में
डॉ कफील खान को 13 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सटी में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को मुंबई एयरपोर्ट से एसटीएफ ने हिरासत में ले लिया था. इसके बाद रासुका के तहत कार्रवाई करके पुलिस ने उनकी हिरासत को बढ़ा दिया था. इसके बाद बीते माह अगस्त की 11 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान आदेश दिया था कि 15 दिनों के भीतर उनकी याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली जाए.


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