कितने चांद उगे हैं अम्बर में
कितने तारे बन अम्बर को घेरे हैं
कितनी सहज सितारों की दुनिया है
जो गए धरा से वहीं पर ठहरे हैं
कितने चांद अधूरे कितने पूरे हैं?
अब पल पल दूर ये सांझ सवेरे हैं
इनके भी राज़ बड़े गहरें हैं!
कितने चांद अधूरे कितने पूरे हैं?
भंवरे जो उड़ रहें हैं, इधर-उधर
खुद करें खता फिर हमको ही घूरे हैं
खुशबुओं से महकाते हैं चमन को
फिर भी फूलों पर कड़े पहरें हैं.
पक्के मकानों में कच्चे रिश्तों के बसेरे हैं
सामने रंग बदलते चेहरे हैं.
कोई निकलेगा, सन्नाटा चीरेगा!
इसी आस में हम भी ठहरें हैं!
कितने चांद अधूरे कितने पूरे हैं?
अब पल पल दूर ये सांझ सवेरे हैं
इनके भी राज़ बड़े गहरें हैं!
कितने चांद अधूरे कितने पूरे हैं?
https://trishullko.blogspot.com/2020/05/blog-post_18.html

2 Comments
Super b bhai
ReplyDeleteBeautiful line
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