खुद से हूं बिछड़ा, तुमको भी कुछ याद नहीं
अबसे फरियाद नहीं, चलो कोई बात नहीं.
अबसे फरियाद नहीं, चलो कोई बात नहीं.
हां और न के बीच मैं कुछ यूं झूलता रहा हूं
तुम को कर के याद खुद को भूलता रहा हूं.
तुम को कर के याद खुद को भूलता रहा हूं.
आज फिर बैठकर अंधेरे को तक रहा हूं
खता खुद की खुद ही तहरीर लिख रहा हूं
खता खुद की खुद ही तहरीर लिख रहा हूं
खुद से हूं बिछड़ा तुमको भी कुछ याद नहीं
अबसे फरियाद, नहीं चलो कोई बात नहीं.
अबसे फरियाद, नहीं चलो कोई बात नहीं.
भरे समंदर के अबसे हैं खाली जज़्बात नहीं
कहने को क्या है, बचे ही कुछ अल्फ़ाज़ नहीं
कहने को क्या है, बचे ही कुछ अल्फ़ाज़ नहीं
खुद से हूं बिछड़ा तुमको भी कुछ याद नहीं
अबसे फरियाद नहीं, चलो कोई बात नहीं.
अबसे फरियाद नहीं, चलो कोई बात नहीं.

6 Comments
जबरदस्त भाई
ReplyDeleteBahut badiya
ReplyDeleteNice lines
ReplyDeleteBindaash bhai likhaye raho
ReplyDeleteVery Nice lines Bhai...👌👌
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर
ReplyDelete