साँसों की सिफ़ारिश



मौत के साये में जाता हूँ लौट आने की आस लगाती है
सांसो की सिफ़ारिश पर ज़िन्दगी अपने पास बुलाती है.

लरज़ते लफ़्ज़ों से बहते अश्क़ों से ज़ख़्म सीने नही देते
रुस्वा भी नही हैं और रुस्वाई का डर भी जाने नही देते.

साँसों की सिफ़ारिश पर कितने इम्तेहान यूँ ही जारी है
मौत कुछ भी नही इससे तो अपनी अच्छी ख़ासी यारी है.

जिस्म को तन्हा छोड़ दें सांसे अभी इस कदर बेवफा नही
हमपे मेहरबां हैं साँसों की सिफ़ारिश पर हमसे खफा नही.

मौत के साये में जाता हूँ लौट आने की आस लगाती है
सांसो की सिफ़ारिश पर ज़िन्दगी अपने पास बुलाती है.

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