सरकारी तथाकथित रामराज को आये लगभग दो साल से ज्यादा समय बीत गया है। जी हां! हम बात कर रहे है भाजपा शासित उत्तर प्रदेश के वर्तमान हालात की सरकार बनने से पहले और बाद तक उत्तर प्रदेश में रामराज की स्थापना की बात कही गयी जनता भी उत्सुक थी रामराज को निहारने को।
ऐसा होगा रामराज किसी को उम्मीद भी न थी!
बीते दो सालों में जहरीली शराब से होने वाली मौतों की घटनाएं तकरीबन आधा दर्जन के आंकड़े को भी पार कर गयी हैं। जिसमें सैकड़ों लोग जान भी गवां चुके है।
27 मई को बाराबंकी जनपद के मोहम्मदपुर खाला इलाके के रानीगंज में विषैली शराब पीने से लगभग 16 लोग जान गवां चुके है, जबकि जहरीली शराब ने दस लोगों की आँखों की रौशनी छीन ली है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं ऐसी है कि सीएचसी पर लोगो स्ट्रेचर तक नसीब न हुआ। पीडितों को ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। जहाँ पर उनका इलाज चल रहा है।
यहाँ पर स्पष्ट करना होगा की शराब जी जितनी भी घटनाये होती है उनमें ज्यादारतर कच्ची शराब का मामला संज्ञान में आता है लेकिन रानीगंज में लोगो ने सरकारी ठेके से देशी शराब खरीदकर पी थी। ऐसे में सरकारी शराब में मिलावट का खेल जा रहा खेल भी उजागर होता है । कच्ची शराब का मामला सरकार सुलझा नही पा रही है और सरकारी शराब भी मिलावट के आगोश में लीन हो गयी है।
ठेके की शराब से हुई मौतों का यह पहला मामला नही है इससे पहले 2008 में बसपा शासनकाल में सरकारी ठेके से शराब पीकर सात लोगों की मौत हो गयी थी।
जब से वर्तमान सरकार सत्ता में आयी है वर्षो पुराने आबकारी कानूनों में परिवर्तन किया है। शराब पीकर किसी की मौत होने के मालमले में उम्रकैद तक प्रावधान है, एकसाथ कई मौतें होने पर सजा ए मौत तक का नियम है।
ऐसी घटनाओ पर सरकार का वही पुराना रूख बदस्तूर जारी है मृतकों को 2 लाख रूपए का मुआवजा, प्रकरण से सम्बंधित अधिकारियों का निलंबन, जांच के नाम पर लेटलतीफी करना जिससे अपराधी वर्ग सुबूत को शिथिल कर सके।
सरकार भी करवाई के नाम पर चुनाव में वोटों की लहलहाती फसल काट सके।
लेकिन सवाल यह उठता है कि उनके परिवारों का क्या होगा जिन्होंने सरकारी शराब पीकर जान तो गवाँई ही अपने बच्चों को भी अनाथ कर दिया। किसी के परिवार में शराब की लत ने महिला का सुहाग उजाड़ दिया।
0 Comments