2014 के लोकसभा आम चुनाव व उसके बाद के कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के हाथों करारी हार के बाद
देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने एलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
यानि की ईवीएम पर संदेह जताते हुए, फिर से देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते हुए, चुनाव आयोग की निष्पक्षता तक पर भी सवाल खड़े किये .
जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सत्यापित पेपर आडिट ट्रेल (vvpat) के साथ ईवीएम का उपयोग करना सुनिश्चित किया.
जिसके द्वारा मतदाता को यह पता लग जाता है की उसने जिसको वोट दिया है, वोट usi को गया है.
यदि विशेषज्ञों की माने तो इससे ईवीएम से छेड़छाड़ करने की संभावना काफी कम हो जाती है.
जो पार्टिया पिछले कुछ वर्षों में लगातार हार का मुँह देख रही थी. वे अपनी हार के लिए सिर्फ ईवीएम मशीन को जिम्मेदार ठहरा रही थी, और ईवीएम पर पर शोर शराबा कर रही थी.
आज उनके सुर बदले- बदले हैं.
शायद यह पिछले दिनों आये पांच राज्यों के चुनाव परिणाम का ही असर हैं.
इन राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने केंद्र में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस के साथ सपा, बसपा व अन्य विपक्षी पार्टियां जो कल तक ईवीएम को कोस रहीं थी. वे दल आज ईवीएम पर पूरी तरह से मौंन हैं.
0 Comments