यूँ तो लखनऊ शहर में जाम लगना कोई नई बात नही है.
सूबे की राजधानी होने के साथ- साथ ही यहाँ पर विभिन्न संस्थाओं के मुख्यालय और बड़े- बड़े स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, व अस्पताल भी लखनऊ में ही स्थित हैं.
ऐसे में लोग अच्छी शिक्षा और चिकित्सीय सुविधाओं के लिए लखनऊ की तरफ रुख करते हैं.
जिस कारण लखनऊ की सड़कें दो पहिया, चार पहिया व अन्य यातायात के साधनों से भी पूरी तरीके से पटी रहती है.
इन कारणों के अलावा यदि इस मुद्दे को पर यदि गौर न किया जाए तो बात अधूरी ही रह जाएगी.
शहर में स्थित राजनीतिक पार्टियों व कार्यालयों की बढ़ती संख्या भी शहर में आये दिन लगने वाले जाम का प्रमुख कारण हैं.
आपने शहर आने के दौरान देखा होगा की जिन- जिंन सड़कों पर राजनीतिक दलों के कार्यालय हैं और उनके सामने खड़े सैकड़ों वाहन सडकों पर लगने भयानक वाले जाम का कारण बनते हैं.
जिस कारण इलाज व जरूरी काम से शहर आये लोगो को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता हैं
2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों की रैलियां भी शुरू हो चूकीं हैं, जो शहर की सड़कों पर भीड़ बढ़ाने का काम करती हैं, जिस कारण रोजगार की तलाश में युवा वर्ग किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए राजधानी आते हैं तो उन्हे भी शहर के जाम से दो चार होना पड़ता हैं.
ऐसे में सूबे की सरकार को चाहिए की जाम की समस्या से निपटने के लिए सकारात्मक कदम उठाए.
और शहर में मौजूद संस्थाओं और सुविधाओं का विकेंद्रीकरण करके अन्य जिलों में भी ऐसी व्यवस्था करें
जिससे वहाँ के लोगो को वही सारी सुविधाओं का लाभ मिले और कुछ हद तक राजधानी के जाम को कम किया जा सकें.
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