खत्म होना हैं
जिस सफ़र को,
आज उस सफ़र की
शुरुआत करता हूँ.
मैं अपनी कलम से
यही बात
यही अल्फ़ाज़ लिखता हूँ.
कल की कुछ बात
और थी यारों
मैं कल को कल ही
लिखता था.
आज की बात करूँ यारों तो
आने वाले कल को भी
आज लिखता हूँ.
होगा जो दूर महबूब मेरा
मैं उसका कल
आज लिखता हूँ.
सुरमयी संगीत सम
प्रकृति है उसकी.
अच्छाइयों की कोई
उसकी सानी नही.
हर कोई लिख सके
वह ऐसी कहानी नही.
वह अपना व्यहार वह कहाँ?
बदल पाएगी.
आसमां के हृदय पर,
बदली बन छायेगी.
मिले साज अच्छा तो
वह संगीत
मधुर बन जाएगी.
दिल की धड़कन
वह मेरी
मेरे दिल के ज़ज्बात
कहाँ? पाएगी!
सफ़र जब खत्म हो
दिल की धड़कनों का
दूर होके भी मेरे वह
पास हो......
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