21 वीं सदी का: ये कैसा समाज


             
काफी दिनों से कुछ लिखने की सोच रहा था.
शायद समय भी सही और मुद्द्दा भी!
आज एक टेलीविज़न न्यूज़ कार्यक्रम देखने के बाद सोचा की शायद इस विषय पर लिखना जरूरी सा लगता है.
बात उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की है, जहाँ पर तथाकथित जाति व्यवस्था के दो अलग- अलग व्यक्तियों के बीच का मामला हैं.
पीड़ित व्यक्ति आज भी दर- दर भटकने  को मजबूर है.
टेलीविज़न कार्यक्रम में आये उस व्यक्ति ने काफी घबराहट भरे लहजे में अपनी परेशानी बताते हुए यह आशंका भी व्यक्त की अब मुझे वो लोग(विरोधी) मुझे जान से मार देंगे.
मामला यह की सीतापुर पीड़ित व्यक्ति  जो की दलित है उसकी  जमीन लगभग 27 साल पहले वही के रहने वाले वाले व्यक्ति जो ऊँची जाती का है ने धोखे से अपने नाम करा ली थी.
अपनी जमीन को बचाने के लिए वह बुजुर्ग आदमी काफी सालों से न्याय की उम्मीद में सरकारी आला अधिकारियों के चक्कर काट रहा है.
और उस आदमी ने ये भी बताया की जब भी पुलिस थाने या कप्तान साहब के कार्यालय जाओ, तो वो यही कहते हैं की रिपोर्ट में यदि तुमने अपनी जाति लिखवाई तो तुम्हारी रिपोर्ट नही लिखी जाएगी.
शायद सही कहते हैं पुलिस वाले उस आदमी से की अपनी रिपोर्ट में जाति न लिखवाओं, क्योंकि जाति लिखवाने से अपराधियों पर एस सी, एस टी एक्ट लग जाने के बाद कार्यवाही तो करनी ही पड़ेगी अपराधियों के खिलाफ़!
अपराधियों को बचाने के लिए पुलिस के अधिकारी किस हद तक गिरे हैं या गिर सकते हैं.
ये तो आप अंदाजा लगा सकते हैं. ये कोई पहला वाक़या नही है गरीबों और दलितों के साथ ऐसे न जाने कितने मामलों को अंजाम देते हैं वे लोग जो अपने को सवर्ण होने का दावा करते हैं(जिन्हे भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होता हैं).
वे इस तरह के अवैध कार्यो में लीन रहते है, किसी भी गरीब की जमीन हथिया लेना उनका पेशा है.
आजादी के बाद से ही निचले तबके के लोगो का शोषण करते आये हैं वे लोग जो अपने को श्रेष्ठ और आर्थिक आधार पर कमजोर लोगो को नीच मानते हैं.
ये वे अपराधी प्रवृति के लोग ही होते है जो एस सी एस टी इसलिए हटाने की  समय समय पर मांग किया करते हैं. जिससे वे इनका शोषण कर सके. और कानून के शिकंजे में न आ सके.
कुछ लोगो का मानना हैं की इस कानून का दुरुपयोग होता है. इसको खत्म करने पर भी विचार किया गया और सर्वोच न्यायालय ने भी इस पर अपनी टिप्पणी दी थी.
 बिल्कुल होता है ऐसा क्यों क्योंकि  भारत जैसे देश में जितने  भी कानून हैं सबका दुरूपयोग होता है.
ये कहकर किसी भी कानून को खत्म और शिथिल नही किया जाना चाहिए, कि उसका दुरूपयोग किया जाता है या किया जा रहा है.
उसका सही तरीके से क्रियांवयन हो जिससे पीड़ित व्यक्ति को न्याय और अपराधी को समय रहते सजा मिल सके.
यह मायने नही रखता की पीड़ित किस जाति का है और अपराधी किस जाति का है.
और अंत में यही कहना चाहूंगा कि भविष्य में किसी भी गरीब को ऐसी घटना का शिकार न बनना पड़े इसके लिए सभी को जानकार और जागरूक होना पड़ेगा.








Post a Comment

0 Comments