कांग्रेस की रणनीति: लोकसभा 2019

         
पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से देश कि सियासत में बदलाव देखने को मिल रहे थे. उससे यह बात स्पष्ट थी की सभी सहयोगी पार्टियों से नकारे जाने के बाद कांग्रेस कोई न कोई कदम जरूर उठाएगी.
कांग्रेस हाई कमान ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर अपना भरपूर दमखम दिखाने की कोशिश तब की जब पिछले विधानसभा चुनाव में साथ लड़ी समाजवादी पार्टी ने आम चुनाव से पहले कांग्रेस का साथ छोड़कर बसपा के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया.
अभी तक केवल अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रहने वाली प्रियंका गांधी अब सक्रिय राजनीति में नजर आएंगी.
हालांकि प्रियंका को राजनीति में आने के लिए पार्टी के कार्यकर्ता समय- समय पर मांग करते रहे हैं.
कांग्रेस पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें ही जीत पायी थी व विधानसभा 2017 में आठ सीटों पर सिमट गयी थी.
यदि इस समय देश के राजनीतिक हालात की चर्चा करे तो सभी राजनीतिक दल पसोपेश की स्थिति में हैं. जबकि  चुनाव में चंद महीनो का ही वक्त शेष बचा है.
भाजपा तो नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ेगी लेकिन विपक्ष में प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए कोई चेहरा ही तय नही कांग्रेस जरूर राहुल गांधी का नाम आगे करती है लेकिन ममता बनर्जी, मायावती और अखिलेश यादव इस पर सहमत नही नजर आते.
ऐसे में कांग्रेस यदि उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ेगी तो उसको  कुछ अप्रत्याशित कदम  उठाने ही पड़ेंगे.
प्रियंका को महासचिव बनाकर कांग्रेस पार्टी ने अकेले लड़ने का बिगुल बजा दिया है.
प्रियंका के आने के बाद कांग्रेस को कितना फायदा होगा ये तो आने वाला वक्त ही बता पायेगा.

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