भारत : जातियों की झाँकी

                     









 भारत जैसे विशाल देश मे जहां  हर व्यक्ति को अपना जीवन- यापन स्वयं के बलबूते करना होता है।  आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए हाड़तोड़ मेहनत करनी पड़ती है।
घर- परिवार की सारी जिम्मेदारियों का निर्वहन परिवार के मुखिया को ही करना पड़ता है। फिर भी पता नही क्यों आज भी ज्यादातर लोग  जाति व्यवस्था में क्यों विश्वास करते है, जो सिर्फ हमे स्वार्थी होना ही सिखाती है।
जो जाति व्यवस्था सदियों से चलती चली आ रही है, उसको पल दो पल या दो चार दस सालों में कदापि नही समाप्त किया जा सकता है ।
क्योंकि अपने देश में हर एक क्षेत्र  विविधताओं के साथ विचित्रताओं के साथ विडंबनाये सर्वस्व व्याप्त है।
 क्योंकि जो परम्परा सदियों से निरंतर चलायमान है  सदियों से
 समाज मे भिन्न - तरीके से सोचने वाले लोग है। मान लीजये कोई इस व्यवस्था का  खुलकर विरोध भी कर् तो भी कोई फर्क नही पड़ने वाला । समर्थन करने वाले भी बहुत  जिनकी रोजी भी जति पात, धर्म कर्म करके ही चलती  है।
आप किसी एक को जिम्मेदार बिलकुल भी नही ठहरा सकते है।
जाति व्यवस्था सबके बारे मे न सोचकर सिर्फ अपने और अपनी जाति विशेष के लोगे के बारे में भला सोचने को मजबूर करती है। तथा समाज मे जितनी भी जातियाँ  है। सभी के मध्य अपनी अपनी प्राथमिकताओं को लेकर संघर्ष निरन्तर चलता रहता है।  जिनसे दंगे फसाद, हत्याएं, व अन्य सामाजिक बुराइयों को पनपने का अवसर मिलता है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है।
जिसके द्वारा मानवता का बंटवारा तक होता है।
बावजूद इसके भी समाज  का कोई भी व्यक्ति हो चाहे आर्थिक स्थिति  उसकी मजबूत हो या कमजोर। किसी एक ऊपर यह आरोप बिलकुल भी नही लगाया जा सकता कि तुम गरीब हो या तुम अमीर हो इस लिए जाती व्यवस्था को मानते हो। इसका अमीरी गरीबी से कुछ भी लेना देना नही है। लेकिन यह बात सौ फ़ीसदी सत्य है कि कुछ बड़ी जातियों के लोग निचली जातियों के लोगो को छुआछूत, निचले स्तर का मानकर उनके साथ दुर्व्यहार करते है।
समाज मे कुछ ऐसे लोग  मौजूद है जो जाती व्यवस्था के आधार पर समाज को दो तबको में बांटने का प्रयास करते है । जिससे कि समाज मे यह लगे कि  समाज मे आज भी उनका दबदबा बरकार है । शायद यह सही समय है कि समाज से जाति जैसी व्यवस्था को समाप्त किया जाये। जाती व्यवस्था को खत्म करने के लिए किसी नेता की नही अपनी सोच में बदलाव लाने की जररूत है।

                        नई जेनरेशन से उम्मीद
आने वाली जेनरेशन पूरी तरह से जातिव्यवस्था को ध्वस्त कर देगी ऐसा पूर्ण रूप से कहा भी नही जा सकता लेकिन इतना अपने अनुभव के आधार पर जरूर कहूँगा की आज जितने भी लोग अभिभावक है वे उनमे से ज्यादारतर लोग निरक्षर है यदि साक्षर है भी तो कोई केवल हस्ताक्षर करने ही जनता है। वे जाती व्यवस्था के साइड इफेक्ट से अनजान है। लेकिन भावी पीढ़ी जब अभिभावक बनेगी तो निश्चित तौर पर पढ़े लिखे होने के कारण वे जाती व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में कार्य करेंगे। जिससे आने वर्षो में इनका असर भी समाज मे देखने को मिलेगा।

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