दर्द जब दिल के समंदर का,
आँखों से छलकता है।
तो अपनो की सौगात होती है।
यही चाहत,
यही दिल्लगी की बात होती है।
तुझे जब तक न सोचूं,
सुबह न मेरी रात होती।
हम उनके प्यार को कुछ ऐसे तरसे।
जैसे बादल उड़ गए हो बिन बरसे!
बरसात न सही उनके स्नेह की।
जाड़े की ओस बनकर,
थोड़ा सा अहसास ही बरसे!
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