पथिक नई राहो के




इस छोटी सी ज़िन्दगी में कितने हमने तूफ़ां देखे, कितने देखने है बाकी।
जितने लम्हे बीत गए, वो!  है क्षणिक , सहज जीवन की एकांकी।
उन लम्हो को याद करो जो बीत गए , जिसमे खोएं है सच्चे साथी।
इस छोटी सी ज़िन्दगी में, कितने हमने तूफ़ां देखे, कितने देखने है बाकी।
तुम पथिक नई राहो के, मत राह का तुम इंतज़ार करो।
राह की सुखद पवन की परछाईं को अपने संग सम्हाल चलो।
मत ओर निहारो उनकी , जिनसे सिर्फ तुम अपने को छलो।
तुम नही विधाता इस जग के , अपनी भूल सहर्ष स्वीकार करो।
तुम पथिक नई राहो के, मत राह का तुम इंतज़ार करो।
ये समां है सुहाना , क्योंकि हमें पता है कि है कौन कहा।
बीत जाए जो ये पल, बीत जाये जो ये घड़ियाँ,  न जाने फिर कौन  कहा?
जो हमसे बिछडी, हम बिछ्डे उन यादों से, उन यादों का  न जाने फिर जहाँ कहाँ।?
ये समां है सुहाना , क्योंकि हमें पता है कि  है कौन कहा।
छूटेंगी ये गलियां, छूट जाएंगे ये कूचे,  किसे पता कौन मिले कौन छूटे?
होंगी वफ़ाओं क़ि बातें बहुत ,  उन बातों में गुजरेंगी राते बहुत , उन रातों से कोई पूछे?
है कौन अपना यहाँ , अपनों के बारे में सोचे कोई, वो कहते है हमें अपना,  तो मेरा भी संदेस उन तक पहुँचे।
छूटेंगी ये गलियां, छूट जाएंगे ये कूचे,  किसे पता कौन मिले कौन छूटे?

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