डिजिटल इंडिया के सपने को पंख लगाती डिजिटल एजुकेशन

 डिजिटल एजुकेशन

डिजिटल एजुकेशन या  आंकिक शिक्षा ज़िसका सामान्य सा अर्थ है, कि जब हम विजुअलआडियो प्रोजेक्टर ,पावर प्वाइट प्रेजेन्टेशनपीडीएफआनलाइन वेबसाइट, ईबुकआनलाइन लाइबेरी और आज के दौर के अन्य उपकरण जिनके माध्यम से शिक्षा प्राप्त करते हैतो वह शिक्षा,  आंकिक शिक्षा कहलाती है.
      आज से लगभग  10-15 साल पहले हमारे पास आज की तुलना मे इतने आधुनिक उपकरण मौजूद नहीं थे. आज देश परम्परागत शिक्षा के साथ ही डिजिटल एजुकेशन का भी पर्याय बन रहा है .लोगो को डिजिटल एजुकेशन के बारे मे पता चल रहा है. वे लोग अपने बच्चो को  डिजिटल एजुकेशन के  देश और दुनिया मे बढते प्रभाव और इसके फायदे के बारे मे बताते हैदेश के अंतराष्ट्रीय व अनेक स्कूलो मे डिजिटल माध्यम से पढाई हो रही है.
      देश के विभिन्न् राज्यो के सरकारी विद्यालयो मे भी डिजिटल एजुकेशन  शुरू की जा चुकी है. ज़हा पर परम्परागत  पढाई  के साथ डिजिटल माध्यामो  से भी पढाई करायी जा रही है, जो की सराहनीय कार्य है.
      परम्परागत शिक्षा की अपेक्षा डिजिटल एजुकेशन ज्यादा सुनियोजित होगी. किताबो को पढना,विद्यालय  की कक्षा  मे बैठकर  शिक्षक के विचारो  को सुनना,पीठ पर बैग लादकर स्कूल जाना, होमवर्क करना इत्यादि  चीजे बदल रही है.
आने वाले कुछ वर्षो  मे वह दिन दूर नहीं होंगे, जब भारत के प्रत्येक विद्यालयो,  विश्ववविद्यालयो मे परम्परागत शिक्षा को पीछे  छोडते हुए, देशभर के स्कूलो मे डिजिटल एजुकेशन का परचम लहरायेगा.
डिजिटल एजुकेशन के बढते प्रभाव  के कारण  वर्षों से चली आ रही किताबो से पढाई करने की पुरानी आदते बीती  बाते इतिहास हो जायेगी.
डिजिटल एजुकेशन मे तरीका बिलकुल अलग हैज़िसमे विद्यार्थी इंटरनेट के माध्यम से ही अपना होमवर्क कर लेता है. ज़िससे उनके अभिभावकों पर होमवर्क  कारवाने  का दबाव  नही होता है. डिजिटल माध्यमो  के द्वारा आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी  कर सकते है. यूट्यूब इसका एक सशक्त उदाहरण है,जिसके द्वारा  विभिन्न  शिक्षण संस्थान अपने विद्यार्थियो  को ऑन्लाइन होकर उनके प्रश्नों का उत्तर देते है.

                      दूरस्थ शिक्षा  की आत्मा है डिजिटल एजुकेशन

डिजिटल एजुकेशन दूरस्थ शिक्षा  का अभिन्न  अंग है. डिजिटल डिवाइसेस के बिना  दूरस्थ शिक्षा  की कल्पना नही की जा सकती है. दूरस्थ शिक्षा ,शिक्षा की वह इकाई हैजिसमे यह जरुरी नही हैकि अध्यापक और विद्यार्थी एक निश्चित  समय मे एक निश्चित जगह पर आकर ही पढ़ने व पढाने  की कोई बाध्यता नही होती है.
क्योंकि इसमें मे छात्र  कम्प्यूटर् ,लैपटाप व  और बहुत सारी    डिजिटल  डिवाइसेस का उपयोग  करके अध्ययन करता है.
दूरस्थ शिक्षा के लिए प्रख्यात  विश्व का सबसे बड़ा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली स्थित है, ज़िसकी स्थापना 1सितम्बर  सन 1985
को हुई थीं.  विश्वविद्यालय मे देश के अलावा दुनियाभर के 33 देशो के लोग  पढाई करते हैजिनकी संख्या  कुल मिलाकर  40 लाख है. इस विश्वविद्यालय की शाखाएं देश के राज्यो के अलावा विदेशो मे भी हैयहाँ पर डिग्री,डिप्लोमा और पीएचडी आदि कोर्सेज़ कराये जाते है.

           डिजिटल एजुकेशन के विस्तार मे आई.सी.टी का योगदान 

यदि रेडियो को सूचना एव संचार  प्राद्योगिकी सबसे पुराना माध्यम  कहा  जाये तो, यह कतई गलत न होगा ,क्योंकि आज से काफी सालों पहले संचार के लिये  रेडियो ही मौजूद था. लोग किसी भी खबर  के लिए घण्टो रेडियो से चिपके रहते थे. आज भी  रेडियो संचारशिक्षा के क्षेत्र  मे अपनी उपयोगिता  साबित  कर रहा है. रेडियो पर कई  ऐसे कार्यक्रमो का प्रसारण होता है. जिनका निर्माण बच्चो की रुचि को ध्यान मे रखकर किया जाता है.
     रेडियो के बाद टेलीविजन का आगमन हुआ, जिसके  आने के पश्चात  लोगो की दूरदर्शन मे आस्था बढती गई.  अपनी संचार  शक्ति  के द्वारा टेलीविजन ने  लोगो को एक दूसरे  की संस्कृति, कलाको जानने पहचानने मे मदद की टेलीविजन पढे लिखे और अनपढ दोनो के लिये उपयोगी है.
     इंटरनेट जो की रेडियो और  टेलीविजन की अपेक्षा थोड़ा  सा खर्चीला होने के साथ ही  एक बेहद  ही सशक्त प्राणाली है, ज़िसके इस्तेमाल से इंसान अपने कम्प्यूटर/ स्मार्टफोन से पढाई कर सकता हैकिसी भी विषय के बारे मे जानकारी पा  सकते है.  इंटरनेट का  इस्तेमाल करके ईमेलसन्देश भी भेजे जा सकते है. आँकिक  शिक्षा को सूचना एव संचार  प्राद्योगिकी के उपकरणो ने   को काफी व्यापकता  प्रदान की है.
आई सी टी के उपकरणो के इस्तेमाल से देश मे पहले की अपेक्षा आज आंकिक शिक्षा का वर्चस्व फैल रहा है.               
    
डिजिटल एजुकेशन का महत्व एव आवश्यकता


आज आप अपने चारो ओर देखेंगे  तो पायेंगे कि, हर तरफ तकनीकी का प्रभाव   बढा  है. कम्प्यूटर साधारण सी साधारण दुकान व् अन्य जगहों पर आसानी  से देखने को  मिल ज़ायेंगे. क्या  कोई उनका सही मायनो  मे सदुपयोग  करता है. शायद नही, क्योंकि उन  उपकरणो के उपयोग के बारे मे उनको  पूर्ण जानकारी नही है |
     इस तरह के लोगो को सरकार के द्वारा चिन्हित करके  उनको उपकरणो के उपयोग से सम्बंधित उनको  आवश्यक प्रशिक्षण दिलवाना चाहिए.  ज़िससे  वे इनका बखूबी से प्रयोग करना सीख सके.
इसी  के क्रम मे भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने  2014 के आम चुनावो मे जीत हासिल  कर सत्ता मे आने के बाद डिजिटल इंडिया योजना को  जुलाई 2015 को लांच कियाज़िसका मकसद प्रत्येक व्यक्ति तक इंटरनेट की पहुचफ़ोन की उपलब्धता,विश्वाविद्यालयो स्कूलो मे फ्री वाई फाई की सुविधा को शुरू करना था.
देश के  2.50 लाख ग्रामो  को ब्रांडबैंड हाइवे के जरिये इंटरनेट  से जोडना.
देश के सभी सरकारी विभागो को आनलाईन करना ज़िससे सरकारी विभागो मे वर्षो  से पैर पसारे भ्रष्टचार को रोका  जा सके.
डिजिटल इंडिया योजना का यदि सही क्रियान्वयन करना व  यदि भविष्य मे इसके दूरगामी परिणाम प्राप्त करने है, तो यह केवल डिजिटल एजुकेशन के प्रयोग से ही संभव है. सबको डिजिटली प्रशिक्षित करके प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को सच किया जा सके.
यदि देश के सभी लोग भारत को एक डिजिटल देश  के रुप मे  देखना  चाहते  हैतो भारत सरकार  बिना विलम्ब डिजिटल एजुकेशन को सभी स्कूलो कालेजो मे अनिवार्य  कर देना चाहिए.  ज़िससे  देश को पूर्ण डिजिटाइज किया जा सके.
आने  वाले  कुछ सालों मे भारत विश्व  मे अपनी पहचान तकनीक व्   शिक्षा  की मदद से बनायेगा  और इसी के साथ  डिजिटल इंडिया की छवि को स्थापित  कर विश्व की डिजिटल और आर्थिक  महाशक्ति बनेगा.



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1 Comments

  1. डिजिटल एजुकेशन से देः तेजी के साथ बदल रहा है , तथा प्रगति कर रहा है।

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