लखनऊ क ह्रदय कहे जाने वाले हजरतगंज से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित दक्षिणमुखी मंदिर में यो तो रोज श्रद्धालु मरी माता के मंदिर आते रहते है। तथा यहां पर शुक्रवार और सोमवार को काफी भारी संख्या में श्रद्धालु आते है। जो भी व्यक्ति मंदिर के सामने से गुजरता है, तो वह चाहे एक बार हि क्यों न वह मंदिर के सामने सिर अवश्य ही झुकाता है।
मंदिर के इतिहास के बारे में ज्यादा तो पता नहीं पर स्थानीय लोग और बड़े बुजुर्ग मंदिर के बारे में इतना जरूर बताते है, कि मंदिर काफी प्राचीन है , तथा पहले मंदिर छोटे आकार का था । लेकिन आज से काफी पहले इसका पुनर्निर्माण किया गया था। मंदिर की ख़ास बात यह है की मंदिर में कोई भी देवी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित नहीं है। मंदिर के चारो ओर बंधी घंटिया और चुनरियाँ जो मंदिर की सुन्दरता में चार चाँद लगाती है।
तथा पूरा मंदिर घंटियों से ढका हुआ है और दूर से देखने पर आपको मंदिर के हर ओर घंटियाँ ही घंटियाँ दिखाई देंगी क्योंकि जिस किसी भी भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। तो वह मंदिर में घंटी चढ़ाता है। खासकर नवरात्र के महीने में मंदिर में अनेक प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान होने के साथ ही मेले का भी आयोजन मंदिर के अगल बगल का वातावरण बिलकुल सुरम्य है ।
मंदिर के रोड पर स्थित होने के कारण सामने से गाडिया गुजरती रहती है। जिस कारण यदि कोई आयोजन होता है तो मंदिर के पीछे पड़ी जगह पर होता है । तथा वही पर मेला भी लगता है ।मंदिर के बायीं तरफ एक साईकिल बनाने वाले की दूकान है , तथा वह रोड के किनारे ही बनायीं अपनी झुग्गी में अपने दो बच्चो के साथ रहता है। बायीं ओर नीचे की तरफ हजरत रसूले शाह बाबा की मजार है , जहा पर हर साल मई महीने के आखिरी तीन दिनों में सालाना उर्स एवं मेले क आयोजन होता है।

2 Comments
एक और आप का सराहनीय लेख पढ़ने को मिला जिससे मन बाग बाग हो गया आप ऐसे ही लेख लिखते रहे जिससे लोगो को समाज पृति कुछ जानकारीयॉ हासिल हो!
ReplyDeleteहां कोशिश तो यही है
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